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गाजीपुर: जनपद के कासिमाबाद थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक माँ को अपनी पुत्री के विवाह की तैयारी करने की सजा लहूलुहान होकर चुकानी पड़ी। ग्राम बेरूकहीं निवासी रम्भा देवी पर उनकी बेटी की शादी से महज तीन दिन पहले पड़ोस के दबंगों ने संगठित होकर जानलेवा हमला कर दिया। घटना के जो साक्ष्य सामने आए हैं, वे इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस के पक्षपातपूर्ण रवैये पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।
विवाद की जड़: सार्वजनिक मार्ग पर अवैध कब्जा
घटना का मुख्य कारण गाँव के सार्वजनिक मार्ग पर किया गया अवैध अतिक्रमण बताया जा रहा है। प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार, आरोपियों ने सड़क के ऊपर एक अवैध ‘फुट ओवरब्रिज’ का ढांचा खड़ा कर रखा है, जिससे बाहर निकले हुए लोहे के सरिए आवागमन के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं।
पीड़िता के अनुसार, 08 फरवरी को जब वह बेटी की बारात के स्वागत हेतु रास्ते के गड्ढों को राबिस से भरवा रही थीं, तब आरोपी संदीप, संघर्ष और शशिकांत कुशवाहा ने रास्ते के बीचों-बीच अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।
तस्वीरों में कैद हुई हिंसा की भयावहता




घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरें चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि हमला कितना बर्बर था। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि हमलावर लंबी लाठियाँ लेकर निहत्थे ग्रामीणों पर प्रहार कर रहे हैं। इस हमले में कई ग्रामीणों के सिर फट गए और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों के सिर से बहता खून और पट्टियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि हमला जान से मारने की नीयत से किया गया था।
सेना की वर्दी का धौंस और प्रशासनिक उदासीनता
ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपी संघर्ष कुशवाहा, जो सेना में कार्यरत बताया जाता है, अपने रसूख और वर्दी का धौंस दिखाकर पूरे गाँव को आतंकित करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि उपजिलाधिकारी (SDM) कासिमाबाद द्वारा मार्ग से अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी होने के बावजूद, प्रशासन ने इसे हटाने की जहमत नहीं उठाई, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं।
पीड़िता बनी मुजरिम: पुलिस की एकतरफा कार्यवाही
पीड़िता रम्भा देवी का आरोप है कि कासिमाबाद पुलिस ने उनकी तहरीर पर FIR दर्ज करने के बजाय उन्हें घंटों थाने में बैठाए रखा और उल्टा उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पीड़िता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी अत्यंत भय और असुरक्षा के माहौल में संपन्न हुई। पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को डाक से भेजी गई शिकायत के बाद भी अब तक दोषियों पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई है।
यह मामला न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार के ‘मिशन शक्ति’ अभियान पर भी एक काला धब्बा है। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इन पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर कब कार्यवाही करते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट: वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज गाजीपुर
साक्ष्य संलग्न: घटनास्थल की तस्वीरें (हमले की मुद्रा, घायल ग्रामीण, और अवैध निर्माण)





